अध्याय 18 श्लोक 58
यदि तुम मुझसे भावनाभावित होगे, तो मेरी कृपा से तुम बद्ध जीवन के सारे अवरोधों को लाँघ जाओगे | लेकिन यदि तुम मिथ्या अहंकारवश ऐसी चेतना में कर्म नहीं करोगे और मेरी बात नहीं सुनोगे, तो तुम विनष्ट हो जाओगे |
अध्याय…
चार वेद की मातु पुनीता। तुम ब्रह्माणी गौरी सीता॥ महामंत्र जितने जग ...
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अध्याय 18 श्लोक 59
यदि तुम मेरे निर्देशानुसार कर्म नहीं करते और युद्ध में प्रवृत्त नहीं होते हो, तो तुम कुमार्ग पर जाओगे । तुम्हें अपने स्वभाव वश युद्ध में लगना पड़ेगा ।
अध्याय 18 : उपसंहार - संन्यास की सिद्धि
श्लोक …
तू कल्याणी वाणी Tu Kalyani Vani | Shantikunj Rishi Chintan Youtube Channel Shantikunj Rishi Chintan Youtube ...
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अध्याय 18 श्लोक 60
इस समय तुम मोहवश मेरे निर्देशानुसार कर्म करने से मना कर रहे हो । लेकिन हे कुन्तीपुत्र! तुम अपने ही स्वभाव से उत्पन्न कर्म द्वारा बाध्य होकर वही सब करोगे ।
अध्याय 18 : उपसंहार - संन्यास की सिद्धि …
दुःख से डरिये मत | Dukha Se Dariye Mat पूज्य गुरुदेव पं० श्रीराम शर्मा ...
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अध्याय 18 श्लोक 61
हे अर्जुन! परमेश्र्वर प्रत्येक जीव के हृदय में स्थित हैं और भौतिक शक्ति से निर्मित यन्त्र में सवार की भाँति बैठे समस्त जीवों को अपनी माया से घुमा (भरमा) रहे हैं |
अध्याय 18 : उपसंहार - संन्यास की सिद्धि…
कर्तव्य की मर्यादा | Kartvay Ki Maryada | परम पूज्य गुरुदेव पं श्रीराम शर्मा ...
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अध्याय 18 श्लोक 62
हे भारत! सब प्रकार से उसी की शरण में जाओ | उसकी कृपा से तुम परम शान्ति को तथा परम नित्यधाम को प्राप्त करोगे |
अध्याय 18 : उपसंहार - संन्यास की सिद्धि
तमेव शरणं गच्छ सर्वभावेन भारत |…
गुरुदेव दया करके मुझको अपना लेना Gurudev Daya Karke Mujhko Apna Lena Rishi Chintan Youtube ...
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अध्याय 18 श्लोक 63
इस प्रकार मैंने तुम्हें गुह्यतर ज्ञान बतला दिया | इस पर पूरी तरह से मनन करो और तब जो चाहे सो करो |
अध्याय 18 : उपसंहार - संन्यास की सिद्धि
श्लोक 18.63 इति ते ज्ञानमाख्यातं गुह्याद्गुह्यतरं…
निद्रा घायल मस्तिष्क के लिए शान्तिदायिनी औषधि Shantikunj Rishi Chintan Youtube ...
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