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Bhagavad Gita As It Is – Hindi ( श्रीमद्भगवद्गीता यथारूप ): अध्याय 18 श्लोक 18 – 55 , BG 18

  अध्याय 18  श्लोक 55 केवल भक्ति से मुझ भगवान् को यथारूप में जाना जा सकता है | जब मनुष्य ऐसी भक्ति से मेरे पूर्ण भावनामृत में होता है, तो वह वैकुण्ठ जगत् में प्रवेश कर सकता है | अध्याय 18 :   उपसंहार - संन्यास…

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Bhagavad Gita As It Is – Hindi ( श्रीमद्भगवद्गीता यथारूप ): अध्याय 18 श्लोक 18 – 56 , BG 18

  अध्याय 18  श्लोक 56 मेरा शुद्ध भक्त मेरे संरक्षण में, समस्त प्रकार के कार्यों में संलग्न रह कर भी मेरी कृपा से नित्य तथा अविनाशी धाम को प्राप्त होता है | अध्याय 18 :   उपसंहार - संन्यास की सिद्धि श्लोक  18.56 …

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Bhagavad Gita As It Is – Hindi ( श्रीमद्भगवद्गीता यथारूप ): अध्याय 18 श्लोक 18 – 57 , BG 18

  अध्याय 18  श्लोक 57 सारे कार्यों के लिए मुझ पर निर्भर रहो और मेरे संरक्षण में सदा कर्म करो | ऐसी भक्ति में मेरे प्रति पूर्णतया सचेत रहो | अध्याय 18 :   उपसंहार - संन्यास की सिद्धि श्लोक  18.57 चेतसा सर्वकर्माणि…

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