धर्मिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीहरि विष्णु को केला अति प्रिय है। इसलिए यह भी कहा जाता है की उनका निवास स्थान केले के पेड़ में होता है।
हिंदू धर्म में हफ्ते के सातों दिन किसी न किसी देवी देवता को अर्पित हैं तथा उसी प्रकार से गुरुवार का दिन भगवान श्री हरि विष्णु को…
रोती हुई आँखों को मेरे श्याम हंसाते हैं।
रोती हुई आँखों को मेरे श्याम हंसाते हैं। जब कोई नहीं आता मेरे श्याम आते हैं। जिन नजरों को बाबा इक आंख ना भाता था करते थे सभी पर्दा जब मैं दिख जाता था अब वो ही गले लगकर अपना पन जताते हैं जब कोई नहीं आता…………………………………
अध्याय 18 श्लोक 76
हे राजन्! जब मैं कृष्ण तथा अर्जुन के मध्य हुई इस आश्चर्यजनक तथा पवित्र वार्ता का बारम्बार स्मरण करता हूँ, तो प्रति क्षण आह्लाद से गद्गद् हो उठता हूँ |
अध्याय 18 : उपसंहार - संन्यास की सिद्धि
श्लोक…
अध्याय 18 श्लोक 77
हे राजन्! भगवान् कृष्ण के अद्भुत रूप का स्मरण करते ही मैं अधिकाधिक आश्चर्यचकित होता हूँ और पुनःपुनः हर्षित होता हूँ |
अध्याय 18 : उपसंहार - संन्यास की सिद्धि
श्लोक 18.77 तच्च संस्मृत्य संस्मृत्य रूपमत्यद्भुतं हरे:…
भगवद्गीता का शुभारम्भ धृतराष्ट्र की जिज्ञासा से हुआ | वह भीष्म, द्रोण तथा कर्ण जैसे महारथियों की सहायता से अपने पुत्रों की विजय के प्रति आशावान था | उसे आशा थी कि विजय उसके पक्ष में होगी | लेकिन युद्धक्षेत्र के दृश्य का वर्णन करने के बाद संजय ने राजा से कहा “आप अपनी विजय…
जय श्री कृष्ण !!
सभी वैष्णव जन को हमारा दंडवत प्रणाम , आपकी प्रेरणा से भगवद गीता यथारूप ब्लॉग पूर्ण हुआ !!
राजेश प्रभु , अनिरुद्ध मोहन प्रभु और अनगिनत भक्त जिनकी कृपा से यह कार्य पूर्ण हुआ उन सबको हमारी तरफ से साधुवाद और हरि बोल !
" परम विजयते…
ॐ नमस्ते रुद्र मन्यवऽ उतोतऽ इषवे नमः । बाहुभ्याम् उत ते नमः॥1॥ या ते रुद्र शिवा तनूर-घोरा ऽपाप-काशिनी । तया नस्तन्वा शन्तमया गिरिशंताभि चाकशीहि ॥2॥ यामिषुं गिरिशंत हस्ते बिभर्ष्यस्तवे । शिवां गिरित्र तां कुरु मा हिन्सीः पुरुषं जगत् ॥3॥ शिवेन वचसा त्वा गिरिशाच्छा वदामसि । यथा नः सर्वमिज् जगद-यक्ष्मम् सुमनाऽ असत् ॥4॥ अध्य वोचद-धिवक्ता प्रथमो…
गोपाल विंशति स्तोत्रम्
श्रीमान् वेंकटनाथार्यः कवितार्किककेसरी ।
वेदान्ताचार्यवर्यो मे सन्निधत्तां सदा हृदि ॥
वन्दे वृन्दावनचरं वलव्वीजनवल्लभम् ।
जयन्तीसम्भवं धाम वैजयन्तीविभूषणम् ॥ १॥
वाचं निजाङ्करसिकां प्रसमीक्षमाणो
वक्त्रारविन्दविनिवेशितपांचजन्यः ।
वर्णः त्रिकोणरूचिरे वरपुण्डरीके
बद्धासनो जयति वल्लवचक्रवर्ती ॥ २॥
आम्नायगन्धरुदितस्फुरिताधरोष्ठम्
आस्राविलेक्षणमनुक्षणमन्दहासम् ।
गोपालडिम्भवपुषं कुहना जनन्याः
प्राणस्तनन्धयमवैमि परं पुमांसम् ॥ ३॥
आविर्भवत्वनिभृताभरणं पुरस्तात्
आकुंचितैकचरण निभृहितान्यपादम् ।
दध्नानिबद्धमुखरेण निबद्धतालं
नाथस्य नन्दभवने…
प्रोक्ता पञ्चदशी विद्या महात्रिपुरसुन्दरी ।
श्रीमहाषोडशी प्रोक्ता महामाहेश्वरी सदा ॥1॥
प्रोक्ता श्रीदक्षिणा काली महाराज्ञीति संज्ञया ।
लोके ख्याता महाराज्ञी नाम्ना दक्षिणकालिका ।
आगमेषु महाशक्तिः ख्याता श्रीभुवनेश्वरी ॥2॥
महागुप्ता गुह्यकाली नाम्ना शास्त्रेषु कीर्तिता ।
महोग्रतारा निर्दिष्टा महाज्ञप्तेति भूतले ॥3॥
महानन्दा कुब्जिका स्यात् लोकेऽत्र जगदम्बिका ।
त्रिशक्त्याद्याऽत्र चामुण्डा महास्पन्दा प्रकीर्तिता ॥4॥
महामहाशया प्रोक्ता बाला त्रिपुरसुन्दरी ।
श्रीचक्रराजः…
मेरी झोपड़ी के भाग आज खुल जाएंगे, राम आएँगे मेरी झोपड़ी के भाग आज खुल जाएंगे, राम आएँगे
राम आएँगे-आएँगे, राम आएँगे राम आएँगे-आएँगे, राम आएँगे
मेरी झोपड़ी के भाग आज खुल जाएंगे, राम आएँगे मेरी झोपड़ी के भाग आज खुल जाएंगे, राम आएँगे
राम आएँगे तो आंगना सजाऊँगी दिप जलाके दिवाली मनाऊँगी राम आएँगे…
सजा दो घर को गुलशन सा,अवध में राम आए है, अवध मे राम आए है,मेरे सरकार आए है, लगे कुटिया भी दुल्हन सी,लगे कुटिया भी दुल्हन सी, अवध मे राम आए है,सजा दो घर को गुलशन सा, अवध मे राम आए है।।
पखारो इनके चरणों को,बहा कर प्रेम की गंगा, बहा कर प्रेम की गंगा,बिछा…
