उसे आना पड़ेगा खाटू में दोबारा हिंदी भजन
उसे आना पड़ेगा खाटू में दोबारा हिंदी भजन
ऐसा है हारे का सहारा, लगता है सबसे ही प्यारा, जिसने इसे निहारा, उसे आना पड़ेगा खाटू में दोबारा |
ऐसा है हारे का सहारा, लगता है सबसे ही प्यारा, जिसने इसे निहारा, उसे आना पड़ेगा खाटू में दोबारा…
अध्याय 18 श्लोक 73
अर्जुन ने कहा – हे कृष्ण, हे अच्युत! अब मेरा मोह दूर हो गया | आपके अनुग्रह से मुझे मेरी स्मरण शक्ति वापस मिल गई | अब मैं संशयरहित तथा दृढ़ हूँ और आपके आदेशानुसार कर्म करने के लिए उद्यत हूँ |
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अधुना गिरिजानन्द आञ्जनेयास्त्रमुत्तमम् ।
समन्त्रं सप्रयोगं च वद मे परमेश्वर ।।१।।
।।ईश्वर उवाच।। ब्रह्मास्त्रं स्तम्भकाधारि महाबलपराक्रम् ।
मन्त्रोद्धारमहं वक्ष्ये श्रृणु त्वं परमेश्वरि ।।२।।
आदौ प्रणवमुच्चार्य मायामन्मथ वाग्भवम् ।
शक्तिवाराहबीजं व वायुबीजमनन्तरम् ।।३।।
विषयं द्वितीयं पश्चाद्वायु-बीजमनन्तरम् ।
ग्रसयुग्मं पुनर्वायुबीजं चोच्चार्य पार्वति ।।४।।
स्फुर-युग्मं वायु-बीजं प्रस्फुरद्वितीयं पुनः ।
वायुबीजं ततोच्चार्य हुं फट् स्वाहा समन्वितम् ।।५।।
आञ्जनेयास्त्रमनघे पञ्चपञ्चदशाक्षरम्…
हे राधे रो रो जाता दिल बुला लो अब तो बरसाना
हे राधे रो रो जाता दिल बुला लो अब तो बरसाना बुला लो अब तो बरसाना, बसा लो अब तो बरसाना। बरसाने खो खो जाता दिल, न श्यामा तुझको तरसना। हे राधे रो रो जाता दिल…………………………………………।
दुनिया रचने वाले को भगवान कहते हैं लिरिक्स…
अध्याय 18 श्लोक 74
संजय ने कहा – इस प्रकार मैंने कृष्ण तथा अर्जुन इन दोनों महापुरुषों की वार्ता सुनी | और यह सन्देश इतना अद्भुत है कि मेरे शरीर में रोमाञ्च हो रहा है |
अध्याय 18 : उपसंहार - संन्यास की सिद्धि…
॥ कल्किस्तवः अथवा दशावतारस्तवः ॥ श्रीगणेशाय नमः ।
राजान ऊचुः ।
गद्यानि ।
जय जय निजमायया कल्पिताशेषविशेषकल्पनापरिणामजलाप्लुतलोकत्रयोपकारणमाकलय
मनुनिशम्य पूरितमविजनाविजनाविर्भूतमहामीनशरीर त्वं निजकृतधर्मसेतुसंरक्षण कृतावतारः ॥ १॥
पुनरिह जलधिमथनादृतदेवदानवगणानां
मन्दराचलानयनव्याकुलितानां साहाय्येनादृतचित्तः ।
पर्वतोद्धरणामृतप्राशनरचनावतारः कूर्माकारः प्रसीद
परेश त्वं दीननृपाणाम् ॥ २॥
पुनरिह दितिजबलपरिलंघितवासवसूदनादृत
जितभुवनपराक्रमहिरण्याक्षनिधन
पृथिव्युद्धरणसङ्कल्पाभिनिवेशेन धृतकोलावतार पाहि नः ॥ ३॥
पुनरिह त्रिभुवनजयिनो महाबलपराक्रमस्य
हिरण्यकश्यपोरर्दितानां देववराणां भयभीतानां
कल्याणाय दितिसुतवधप्रेप्सुर्ब्रह्मणो वरदानादवध्यस्त…
महाकौतूहल दक्षिणकाली ह्रदय स्तोत्रम्
दक्षिण काली के इस स्तोत्र के उचयिता स्वयं महाकाल हैं । एक बार महाकाल ने प्रजापिता ब्रह्मा को दंडित करने के लिए उनका शीश काट डाल था । इस कृत्य के कारण उन्हें ब्रह्महत्या का दोष लगा था । इस दोष के निवारणार्थ ही उन्होंने इस स्तोत्र की रचना की थी…
गायत्री शापोद्धार स्तोत्र
ब्रह्मा शाप विमोचन विनियोगः ॐ अस्य श्री ब्रह्मशापविमोचनमंत्रस्य ब्रह्माऋषिर्भुक्तिमुक्तिप्रदा ब्रह्मशापविमोचनी गायत्रीशक्तिर्देवता गायत्रीछन्दः ब्रह्मशापविमोचने विनियोगः | मंत्र-गायत्री ब्रह्मेत्युपासीत यद्रूपं ब्रह्मविदो विदुः | तां पश्यन्ति धीराः सुमनसो वाचमग्रतः | ॐ वेदांतनाथाय विद्महे हिरण्यगर्भाय धीमहि तन्नो ब्रह्म प्रचोदयात | ॐ देवी गायत्रीत्वं ब्रह्मशापाद्विमुक्ता भव |
वसिष्ठ शाप विमोचन विनियोगः ॐ अस्य श्री वसिष्ठशापविमोचनमंत्रस्य निग्रहानुग्रहकर्ता वसिष्ठऋषिर्वशिष्टानु…
तेरी मंद मंद मुस्कनिया भजन हिंदी लिरिक्स
तेरी मंद मंद मुस्कनिया भजन हिंदी लिरिक्स
तेरी मंद मंद मुस्कनिया पे बलिहार राघव जी बलिहार राघव जी, तेरी मंद मंद मुस्कनिया पे बलिहार राघव जी बलिहार राघव जी।
तेरे बाल बड़े घुंघराले बादल हो कारे कारे तेरे बाल बड़े घुंघराले बादल हो कारे कारे, तेरे पांव की…
अध्याय 18 श्लोक 75
व्यास की कृपा से मैंने ये परम गुह्य बातें साक्षात् योगेश्वर कृष्ण के मुख से अर्जुन के प्रति कही जाती हुई सुनीं ।
अध्याय 18 : उपसंहार - संन्यास की सिद्धि
श्लोक 18.75 व्यासप्रसादाच्छ्रुतवानेतद्गुह्यमहं परम् | …
बेलपत्र तोड़ने से पूर्व सदैव इस मंत्र से
बिल्ववृक्ष को नमस्कार कर के प्रार्थना कर के ही
बेलपत्र तोड़ने चाहिए |
|| बेलपत्र तोड़ने का मंत्र ||
अमृतोद्भव श्रीवृक्ष महादेवप्रियः सदा |
गृह्णामि तव पत्राणि शिवपूजार्थमादरात् ||
|| अस्तु ||
बेलपत्र तोड़ने का मंत्र
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तुलसी दल तोड़ने के मन्त्र
जब भी हम तुलसी पत्र तोड़े उससे पहले सदैव तुलसी माता को वंदन करके सबसे पहले इस श्लोक से प्रार्थना करे उसके पश्चात तुलसी का पत्ता तोड़े।
तुलस्यमृतजन्मासि सदा त्वं केशवप्रिया | चिनोमि केशवास्यर्थे वरदा भव शोभने || त्वदङ्ग सम्भवैः पत्रैः पूजयामि यथा हरिम् | तथा कुरु पवित्राङ्गि कलौ मलविनाशिनि…
