Shri Kanakadhara Stotra
कनकधारा स्तोत्रम – अङ्गम हरेः पुलकभूषणमाश्रयन्ती-
ऐसा माना जाता है कि आदि शंकराचार्य ने देवी लक्ष्मी की स्तुति करने और एक गरीब महिला के घर में धन की वर्षा करने के लिए श्री कनकधारा स्तोत्र की रचना की थी, जिसने उन्हें भिक्षा के रूप में आंवला फल दिया था। कनक का अर्थ…
महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र (जिसे अयि गिरि नंदिनी स्तोत्र के नाम से भी जाना जाता है) मूल रूप से गुरु आदि शंकराचार्य द्वारा लिखा गया था। (कुछ स्रोतों का कहना है कि इसे पहली बार भगवान विष्णु ने उस समय लिखा था जब देवी दुर्गा ने राक्षस महिषासुर का वध किया था)। आदि शंकराचार्य कहते हैं,…
कीलक स्तोत्र का पाठ दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अंतर्गत किया जाता है। इस स्तोत्र का पाठ अनिवार्य रूप से दुर्गा कवच और अर्गला स्तोत्र के बाद किया जाता है।
इस स्तोत्र के पहले मंत्र का ३१ बार प्रतिदिन जप करने से मन में शान्ति प्राप्त होती है। यहाँ कीलक स्तोत्र का पूरा विवरण अर्थ…
दुर्गा चालीसा हिंदू धर्म में सबसे लोकप्रिय दैनिक पाठ में से एक है। दुर्गा माता को प्रसन्न करने के लिए भक्त को सुबह या शाम को दुर्गा चालीसा का जाप करना चाहिए। विशेष रूप से नवरात्रि पूजा में, यह चालीसा पाठ मन को शांति देता है, आपके मन को सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है…
भवान्यष्टकम् :
न तातो न माता न बन्धुर्न दाता न पुत्रो न पुत्री न भृत्यो न भर्ता । न जाया न विद्या न वृत्तिर्ममैव गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि ॥१॥
भवाब्धावपारे महादुःखभीरु पपात प्रकामी प्रलोभी प्रमत्तः । कुसंसारपाशप्रबद्धः सदाहं गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि ॥२॥
न जानामि दानं न च ध्यानयोगं न जानामि तन्त्रं न च स्तोत्रमन्त्रम्…
नमस्ते परमेशानि रासमण्डलवासिनी। रासेश्वरि नमस्तेऽस्तु कृष्ण प्राणाधिकप्रिये।।
नमस्त्रैलोक्यजननि प्रसीद करुणार्णवे। ब्रह्मविष्ण्वादिभिर्देवैर्वन्द्यमान पदाम्बुजे।।
नम: सरस्वतीरूपे नम: सावित्रि शंकरि। गंगापद्मावनीरूपे षष्ठि मंगलचण्डिके।।
नमस्ते तुलसीरूपे नमो लक्ष्मीस्वरुपिणी। नमो दुर्गे भगवति नमस्ते सर्वरूपिणी।।
मूलप्रकृतिरूपां त्वां भजाम: करुणार्णवाम्। संसारसागरादस्मदुद्धराम्ब दयां कुरु।।
Shree Radha Stuti Meaning in Hindi
भावार्थ – रासमण्डल में निवास करने वाली हे परमेश्वरि ! आपको नमस्कार है।…
हनुमत बीसा
।। दोहा ।।
राम भक्त विनती करूँ,सुन लो मेरी बात ।
दया करो कुछ मेहर उपाओ, सिर पर रखो हाथ ।।
।। चौपाई ।।
जय हनुमन्त, जय तेरा बीसा,कालनेमि को जैसे खींचा ।।१॥
करुणा पर दो कान हमारो,शत्रु हमारे तत्क्षण मारो ।।२॥
राम भक्त जय जय हनुमन्ता, लंका को थे किये विध्वंसा ।।३॥…
उमापति महेश्वरम नमामि शिव
नमो भूत भूतनाथ नन्दीश्वर श्री हरे,बहत गंग शिरपरे, जटा उतंग फरफरे,
हिमालये उमा सहित, शोभितं निरन्तरं,उमापति महेश्वरम, नमामि शिव शंकरम।।
त्रिताप पाप क्षारणं, प्रभाय धर्म धारणम,समस्त सृष्टि धारणम, मांगल्य मृत्यु कारणम,
अगम अनादि आशुतोष, धुर्जटी धुरंधरम,उमापति महेश्वरम, नमामि शिव शंकरम।।
भले भभूत रंग में, रहत मस्त भंग में,श्मशानघाट वासिनी भुत प्रेत…
ध्यानम् । शान्तं पद्मासनस्थं शशिधरमुकुटं पञ्चवक्त्रं त्रिनेत्रं शूलं वज्रं च खड्गं परशुमभयदं दक्षभागे वहन्तम् । नागं पाशं च घण्टां प्रलयहुतवहं साङ्कुशं वामभागे नानालङ्कारयुक्तं स्फटिकमणिनिभं पार्वतीशं नमामि ॥
स्तोत्रम् । ओं स्थिरः स्थाणुः प्रभुर्भीमः प्रवरो वरदो वरः । सर्वात्मा सर्वविख्यातः सर्वः सर्वकरो भवः ॥ १ ॥
जटी चर्मी शिखण्डी च सर्वाङ्गः सर्वभावनः । हरश्च हरिणाक्षश्च सर्वभूतहरः…
संपुटित श्री सूक्त
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः। ॐ दुर्गे स्मृता हरसिभीतिमशेषजन्तोः स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि। ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्ण रजतस्रजां। चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह॥
दारिद्र्यदुःखभयहारिणि का त्वदन्या सर्वोपकारकरणाय सदार्द्रचित्ता। ॐ दुर्गे स्मृता हरसिभीतिमशेषजन्तोः स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभं ददासि। ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद…
Gayatri Mantra, the quintessence of spiritual awakening, resonates through the tranquil realms of Shantikunj, Haridwar, where ...
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सेवा ही धर्म है | Seva Hi Dharm Hai परम पूज्य गुरुदेव पं श्रीराम शर्मा ...
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